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यज्ञोपवीत
■ प्रश्न:--यज्ञोपवीत में किन किन वर्णो का अधिकार है और इसका महत्व क्या है ?
■ उत्तर:-- ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य ये ही तीनो द्विज के अधिकारी है यज्ञोपवीत ही वह सूत्र है जिससे द्विजो को वेदादि शास्त्रो का अध्ययन में अधिकारी बनाता है बिना यज्ञोपवीत के ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य इन तीनो में से किसी को भी वेदादि में अधिकार नही ।
■ प्रश्न :--- तब तो शुद्र के साथ अन्याय हुआ उन्हें वेदादि ज्ञान से दूर रखा गया |
■ उत्तर:--- जिनका यज्ञोपवीत संस्कार न हो उसको इतिहास पुराण आदि शास्त्रो में अधिकार है इतिहास पुराण आदि को ही पञ्चम वेद की संज्ञा प्राप्त है इतिहास पुराणादि वेदो का ही उपबृंहण (व्याख्या) है जिसको सुनने से वही ज्ञान प्राप्त होता है जो वेदो के अध्ययन से !
वेदो का अध्ययन दुरूह कष्टसाध्य है तो वहीं पुराण सरल और माधुर्य जिस ज्ञान को आप सरलता से पा सकते है ।
वही कठोर नियमादि से तो सभी प्राणी बचना चाहता है ऐसे में भगवन ने आप के लिए सरलतम मार्ग और द्विजो के लिए कठिन मार्ग का बिधान किया |
और रह गई अन्याय की बात तो शास्त्रो में शुद्र को दण्डरहित कहा गया है और ब्राह्मणो को 64 गुना दण्ड का प्रावधान है ,जहाँ शुद्रौ को खान पान आचरण आदि में स्वतंत्रता प्रदान की है वही ब्राह्मणो के लिए खानपान पहनावा,आचरण आदि पर कड़ा प्रावधान है
ऐसे में यदि मैं पूछूँ की ब्राह्मण ही क्यो 64 गुणा दण्ड के अधिकारी है शुद्र क्यो दण्ड रहित ? आखिर क्यों शुद्रौ को स्वतंत्रता प्रदान की और ब्राह्मणो के प्रति कठोर नियम ऐसा क्यो भाई ?
प्रश्नकर्ता मौन 😶😶

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