निरंकारी_मत_भञ्जन
#निरंकारी_भक्त :-- हम मनुष्यो को भगवान का स्वरूप मानते है और तुम लोग मनुष्य के बनाये हुए मूर्ति में ।
#प्रमोद_कुमार :--- यदि निरंकारी कथनानुसार माने तो हमे हत्यारा,चोर,डांकु, ब्यभिचारी,बलात्कारी,मिथ्यावादी,,दुष्टाचारी,आचरण वाले मनुष्य को भी भगवान मानना पड़ेगा दुनिया मे ऐसा कोई सांसारिक ब्यक्ति सायद ही मीले जो 24 घण्टे अथवा एक सप्ताह अथवा एक माह अथवा पूरे वर्ष मिथ्या न कहता हो अथवा धार्मिक ,सामाजिक रूप से ऐसा कोई कार्य न करता हो जो धर्म विरुद्ध न हो ?
यदि मैं आप से पूछूँ की क्या भगवन निर्दयी,चोर,हत्यारा,मिथ्यावादी आदि आदि भी हो सकता है क्या ??तो आपका स्प्ष्ट उत्तर होगा नही नही ऐसा कैसे हो सकता है भगवन तो समस्त पापों से अलिप्त सभी का कल्याण करने वाला होता है । तो इससे तो अच्छा है कि हम श्रीहरि: के विग्रह में ही भगवान की कल्पना क्यो न करे विग्रह तो इन समस्त दोषो से रहित होता है कम से कम आप इस पाप से तो बच जाएंगे कि चोर,डांकु, बलात्कारी ,ब्यभिचारी में आप को भगवान न देखना पड़े अत्याचारी को अत्याचारी के रूप में देखो ।
भगवत् शब्द ही अनादि अक्षय परमात्मा का वाचक है
शास्त्रों में भगवान का लक्षण षड्ऐश्वर्य सम्पन्न बताया गया है जो कि इस कलिकाल में असम्भव जान पड़ता है ।
समस्त ऐश्वर्य ,धर्म,यश,श्री,ज्ञान,और,वैराग्य, इन छ: गुणों को धारण करने वाला ही भगवत् शब्द से वाच्य है अब बिचार करिए कि क्या इस कलिकाल में मनुष्य इनसब गुणों को धारण करने वाला हो सकता है ??
स्वयं निरंकारी प्रमुख हरदेवसिंह भी इन छ: लक्षणों को धारण करने।वाला नही हो सकता क्यो की वे इन लक्षणों से रहित एक साधारण मनुष्य तथा सनातन धर्मद्रोही रहा तभी तो काल के हाथों से कार एक्सीडेंट में मारा गया ? और वह भी काल के हाथों मलेच्छ देश मे मारा गया ।
उसे तो यह पुण्य भूमि भारत भी नसीब न हो सका समस्त शाश्त्रो में भारत को देवताओ का नगरी माना गया है फिर भी हरदेव सिंह जी को यह पुण्य भूमि नसीब नही हुआ क्यो ??
क्यो की उसका कार्य ही धर्मविरुद्ध रहा इस लिए उसे यह पाप तो भोगना ही पड़ा ।
#ऐश्वर्य्यस्य_समग्रस्य_धर्म्मस्य_यशसः_श्रियः ।
#ज्ञान_वैराग्ययोश्चैव_षण्णां_भग_इतीङ्गना ।(विष्णु पुराण)
शैलेन्द्र सिंह
